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बाबा बासुकी नाथ की एक बहुत पुरानी स्तुति

विमल विभूति बूढ़ वरद वाहनवा से, लम्बे लम्बे लट लटकावे बाबा बासुकी |
काल कूट कंठ शोभे नील रे वरनवा से, लाले लाले लोचन घुमाबे बाबा बासुकी |
ऐशन कलेवर बनाये देह्नो नागेश्वर, देखि जन महिमा लुभावे बाबा बासुकी |
अंधे पावे लोचन विविध दुःख मोचन से, कोढिया सुन्दर तन पावे बाबा बासुकी |
निपूत के पूत देत कुमति सुमति देत, निर्धन के करत निहाल बाबा बासुकी |
धन्य धन्य दारुक वन जहाँ बसे आप हर, मेटी देत विधि अंक भाल बाबा बासुकी |
परम आरत हम सुख शांति सब खोई, तेरे द्वारे भिक्षा मांगे आये बाबा बासुकी |
कहत सब गण मेरी बेरी काहे देरी हर, करुणा करत नहीं आवे बाबा बासुकी |
सबके जे सुनी सुनी दूर कैले दुःख सब, हमरा के बेरिया निठुर बाबा बासुकी |
कही कही केकरा अब कहाँ कहाँ जाऊं बाबा, अनाथ के नाथ जे कहाबे बाबा बासुकी |
देवघर देवलोक देव्धन्य महादेव, उहे जे कुकुम कयला जाहू बाबा बासुकी |
तुम बिन अब कोई दृष्टि पथ पाबे नाही, कही के अब अरज सुनाऊँ बाबा बासुकी |
सुनै छेलियन नागनाथ छथिन बड़ा दानी बाबा, अब काहे एहन निठुर बाबा बासुकी |
मातु पिता परिजन सबके तजली हम, शरण अहाँ के हम धरिलों बाबा बासुकी |
हमहूँ जे ऐलौं शरण में अहाँ के बाबा, हमरा के देखि के डरेला बाबा बासुकी |
जहि दिन से ज्ञान भेला हमरा के अब बाबा, तहि दिन से शरण धरिलों बाबा बासुकी |
जहि दिन से शरण अहाँ के हम धरिलों बाबा, तहि दिन से बात सब सुनैलों बाबा बासुकी |
ग्राम देव ग्राम लोक ग्राम धन महादेव, सेहो न सुनै दुःख मोरे बाबा बासुकी |
कहै छि जे दीप हमें दुहु करें जारी बाबा, निपूत के पूत अब देहो बाबा बासुकी |
कहत सेवक तोर दुहू हाथ जोरी बाबा, दुखिया के संकट के हरहूँ बाबा बासुकी |
कहत विनय कर देश के सेवक बाबा, सबके संकट दूर करहूँ बाबा बासुकी |
धन्य धन्य दारुक वन जहाँ बसे आप हर, मेटी देत विधि अंक भाल बाबा बासुकी |
परम आरत हम सुख शांति सब खोई, तेरे द्वारे भिक्षा मांगे आये बाबा बासुकी |

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