इस दुनिया में इतनी रुसवाई क्यूँ होती है
हमारी हमारे ही अहसास से जुदाई क्यूँ होती है
हमसे किसी का इंतज़ार नहीं हो पाता
कोई हमारा राह भी नहीं तक पाता
इस दर्द को हमदर्द से शिकायत ये होती है
सबसे ज्यादा करीब मेरी परछाई क्यूँ होती है
रात में ये परछाई भी साथ छोड़ जाती है
बाद इसके सिर्फ तन्हाई ही साथ रह जाती है
तन्हाई को शिकायत कि परछाई का अहसास क्यूँ
परछाई को गुस्सा कि तन्हाई के पास क्यूँ
एक समय ऐसा कि दोनों का साथ छूट जाता है
हाथ में बस रुसवाई का हाथ रह जाता है
इस दुनिया में इतनी रुसवाई क्यूँ होती है
हमारी हमारे ही अहसास से जुदाई क्यूँ होती है



It’s realy nice chachu…..
its good kavita……..